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फखरुल इस्लाम जो आज बने बांग्लादेश के राष्ट्रपति, उन्हें भी कभी भारत में लेनी पड़ी थी शरण; जानें उनके राजनीतिक उदय की कहानी

 Written By: Vinay Trivedi
 Published : Aug 20, 2026 09:03 pm IST,  Updated : Aug 20, 2026 09:03 pm IST

Bangladesh के नए राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने नगर पालिका अध्यक्ष से राष्ट्रपति बनने तक का सफर तय किया है। फखरुल इस्लाम की कहानी ये भी है कि एक वक्त था जब उन्हें संघर्ष के दौरान भारत में शरण लेनी पड़ी थी। आइए उसके बारे में जानते हैं।

Mirza Fakhrul Islam Alamgir- India TV Hindi
मिर्जा फखरुल इस्लाम को भी कभी भारत में शरण लेनी पड़ी थी। Image Source : AP (फाइल फोटो)

बांग्लादेश की संसद ने आज (गुरुवार को) Bangladesh Nationalist Party के लंबे वक्त से सेक्रेटरी जनरल मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को देश का नया राष्ट्रपति चुन लिया। इसके साथ ही 1960 के दशक में एक वामपंथी स्टूडेंट वर्कर के तौर पर सियासत में कदम रखने वाले मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठा दिया गया। लेकिन एक वक्त था जब मुश्किल के दिनों में फखरुल इस्लाम को भारत में शरण लेनी पड़ी थी। आइए फखरुल इस्लाम के राजनीतिक सफर के बारे में जानते हैं।

अभी तक सरकार में मंत्री थे फखरुल इस्लाम

बता दें कि राष्ट्रपति बनने से पहले मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार में ग्रामीण विकास एवं सहकारिता मंत्री थे। इसके अलावा, मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर BNP के महासचिव की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।

कभी किया था पाकिस्तानी सैन्य समर्थित सरकार का विरोध

जान लें कि ढाका यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान, मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर वामपंथी संगठन 'ईस्ट पाकिस्तान स्टूडेंट्स यूनियन' में शामिल हो गए थे। फिर, 1969 में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर तत्कालीन पाकिस्तानी सैन्य समर्थित सरकार के विरुद्ध हुए जन आंदोलन में ढाका यूनिवर्सिटी में पार्टी की यूनिट के अध्यक्ष बने थे।

फखरुल इस्लाम ने 1971 में भारत में ली थी शरण

इसके बाद, सन् 1971 के मुक्ति संग्राम के वक्त ऐसा समय भी आया था, जब मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को भारत में शरण लेनी पड़ी थी। फिर, उन्होंने वामपंथी स्वतंत्रता सेनानियों को संगठित करने में अहम रोल भी निभाया था।

सियासत में आने के लिए छोड़ी थी सरकारी नौकरी

गौरतलब है कि मुख्यधारा की सियासत में आने से पहले मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर सरकारी नौकरी कर रहे थे। सन् 1972 में सिविल सर्विस के एजुकेशन कैडर में शामिल होकर शिक्षा कैडर Economics के टीचर बने। फिर सियासत में आने के लिए 1986 में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने नौकरी छोड़ दी।

नगर पालिका अध्यक्ष से राष्ट्रपति तक का सफर

इसके दो साल बाद, मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की मेहनत रंग लाई और वह अपने गृहनगर ठाकुरगांव से निर्दलीय कैंडिडेट के तौर पर नगर पालिका अध्यक्ष बन गए। फिर 1990 के दशक की शुरुआत में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बीएनपी का झंडा थामा।

फखरुल इस्लाम को जब पहली बार मिला था मंत्रालय

इसके बाद, 2001 में मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर पहली बार सांसद बने। उन्हें सरकार में मंत्री भी बनाया गया। तब मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को कृषि राज्य मंत्री और नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी दी गई थी। फरवरी, 2026 के आम चुनाव में भी ठाकुरगांव-1 सीट से मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर एक बार फिर चुने गए थे।

(इनपुट- भाषा)

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